Monday, January 9, 2017

दलदल

ये दुनिया बिष से भरा प्याला है
कुछ तो प्रेम रस घोलो इसमे
प्याली सफेद न कर सकते
काला तो मत करो इसे


राह न दिखा सके तो क्या हुआ
राह न भटकाओ इसे
रोशन न कर सकते इस दुनिया को 
अंधकार न फैलाओ इसमे


उससे पूछा तो होता 
एक बार, उसकी सुनी तो होती
उसने चोरी क्यों की
क्यों कूदा इस दलदल मे


हाथ थाम कर तो देखते 
मन टटोल कर तो देखते
उस बदजुबां बालक का
कहीं वो अनाथ तो नही











पत्थर तो सभी मारते है
कभी उसके घाव को हाथ लगाते
पता चलता वो गुमनाम चेहरा भी
हमारे ही रक्त से सींचा हुआ है


तुमने इतना ही जाना इसे
जितना पर्दे ने दिखाया तुम्हे
कभी पर्दा हटाया तो होता 
कभी अंदर झाँक कर देखा तो होता


कभी उससे पूछा तो होता
कभी अपनापन दिखाया तो होता
कभी प्यार बिखेरा तो होता
कभी हाथ बढ़ाया तो होता


ये दुनिया बिष से भरा प्याला है
कुछ तो प्रेम रस घोलो इसमे
Image Credit - Google

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