Wednesday, November 30, 2016

बदलाव

मैं बदलता रहता हूँ
समय बदलता रहता है


उसकी यही नियति है
वह बंधा हुआ है बंधन में
यह उसकी मज़बूरी है 
वह ठहर नहीं सकता
उसकी रफ़्तार एकसमान है
उसे गुजरना पड़ता है
उसे बदलना पड़ता है


मेरी कोई मज़बूरी नहीं
लेकिन मुझे ठहरना पसंद नहीं
चुनोतियों से टकराना अच्छा लगता है
नयी चुनोतियाँ पैदा करता हूँ
पार पाना अच्छा लगता है


हर पल जोश से भरा हुआ
काम करना अच्छा लगता है
आगे बढ़ता जाता हूं
लक्ष्य बदलते रहते है


मैं बदलता रहता हूं
समय बदलता रहता है
मेरी कोई मज़बूरी नहीं
उसे गुजरना पड़ता है

Friday, November 18, 2016

जो मैंने खुद को बहने दिया...

मेरी खासियत है यह
आजतक मैंने खुद को
कभी रोका नहीं, कभी टोका नहीं
अपनी धारा में बहता गया


मानव जाति के विकास निमित्त
मन बंधन मुक्त होना चाहिए
कल्पना शक्ति उड़ान भरे
यही इसका उद्देश्य है


पसंद, प्यार, परंपरा और आकर्षण 
लोग अक्सर धोखा खा जाते हैं
कभी रुकना भी जरुरी होता है
मरम्मत से ताकत बढ़ती ही है


घमंड कभी गौरव प्रदान करती है
नाश का कारण भी बनती है
कुछ बचा नहीं अब शेष
जो मैंने खुद को बहने दिया

Tuesday, November 8, 2016

रिश्ते

दूर रहकर भी कितने पास हैं हम
पास होकर भी बहुत दूर हैं हम

दूरियां हाथ मिलाने से नहीं
दिलों के मिलने से मिटती है


खट्टी - मीठी नोंक - झोंक
फिर प्यारी - सी मुस्कान
चेहरे पर संतोष का भाव
आँखों से छलकता प्यार
रिश्ते की सही पहचान

कहीं रिश्ते विलीन हो जाते हैं
आपसी नोंक - झोंक में
कहीं झगड़े समां जाते हैं
रिश्ते की गहराइयों में

धीमी आंच पर पका भोजन
अधिक स्वादिष्ट होता है
धीरे धीरे दोस्ती से शुरुआत हो
रिश्ता ज्यादा गहरा होता हैं


दोस्ती के बंधन की दुनिया गुलाम
प्यार के समंदर में गोता लगाते लोग
इसे मापने की कोई इकाई नहीं
लेकिन धड़कनो से इसे मापा जाता हैं

दूरियां हाथ मिलाने से नहीं
दिलों के मिलने से मिटती है

Wednesday, November 2, 2016

संघर्ष

मेरी कमजोरी है या मेरी ताकत
मजबूर हूँ या सच्चाई के प्रति दृढ़
परिस्थितियों के अनुसार मुझे
बदलना नहीं आता, ढलना नहीं आता


चुनोती और संघर्ष
जीवन को जीवंत बनाते हैं
ओरों के पीछे डर भागता है
चाहत आपको नचाती है
आत्मविश्वास अपना रास्ता स्वयं बनाता है।


फटे जूत्ते अच्छे नहीं लगते
क्या पता परिस्थिति की मार हो
रास्ते बनाते वक्त पत्थर टकराते है
जूत्ते तो फट ही जाते हैं।


महान लोगों का अनुसरन उचित है
जो स्वयं देख रहा किसी ओर
उसकी ओर एक अंधकार होगा
बुनियाद महान सिद्धान्तों पर हो
आप स्वयं ही महान हो जाते हैं।


ऐसे लोग अक्सर पीछे रह जाते हैं
दूध, दही, मक्खन और घी
घी कभी ख़राब नहीं होता
बाकी कुछ दिनों के मेहमान होते हैं।