दूर रहकर भी कितने पास हैं हम
पास होकर भी बहुत दूर हैं हम
पास होकर भी बहुत दूर हैं हम
दूरियां हाथ मिलाने से नहीं
दिलों के मिलने से मिटती है

खट्टी - मीठी नोंक - झोंक
फिर प्यारी - सी मुस्कान
चेहरे पर संतोष का भाव
आँखों से छलकता प्यार
रिश्ते की सही पहचान
कहीं रिश्ते विलीन हो जाते हैं
आपसी नोंक - झोंक में
कहीं झगड़े समां जाते हैं
रिश्ते की गहराइयों में
धीमी आंच पर पका भोजन
अधिक स्वादिष्ट होता है
धीरे धीरे दोस्ती से शुरुआत हो
रिश्ता ज्यादा गहरा होता हैं
दोस्ती के बंधन की दुनिया गुलाम
प्यार के समंदर में गोता लगाते लोग
इसे मापने की कोई इकाई नहीं
लेकिन धड़कनो से इसे मापा जाता हैं
दूरियां हाथ मिलाने से नहीं
दिलों के मिलने से मिटती है