Showing posts with label दोस्ती. Show all posts
Showing posts with label दोस्ती. Show all posts

Tuesday, November 8, 2016

रिश्ते

दूर रहकर भी कितने पास हैं हम
पास होकर भी बहुत दूर हैं हम

दूरियां हाथ मिलाने से नहीं
दिलों के मिलने से मिटती है


खट्टी - मीठी नोंक - झोंक
फिर प्यारी - सी मुस्कान
चेहरे पर संतोष का भाव
आँखों से छलकता प्यार
रिश्ते की सही पहचान

कहीं रिश्ते विलीन हो जाते हैं
आपसी नोंक - झोंक में
कहीं झगड़े समां जाते हैं
रिश्ते की गहराइयों में

धीमी आंच पर पका भोजन
अधिक स्वादिष्ट होता है
धीरे धीरे दोस्ती से शुरुआत हो
रिश्ता ज्यादा गहरा होता हैं


दोस्ती के बंधन की दुनिया गुलाम
प्यार के समंदर में गोता लगाते लोग
इसे मापने की कोई इकाई नहीं
लेकिन धड़कनो से इसे मापा जाता हैं

दूरियां हाथ मिलाने से नहीं
दिलों के मिलने से मिटती है

Wednesday, October 26, 2016

मैं चला हूँ...

मैं चला हूँ अपने घर से
आगे बढने के लिए, बस आगे ही बढने के लिए
रास्ते में मिले कई राहगीर मुझे
राह बताने के लिए, कुछ भटकाने के लिए

कुछ लोगों के पाँव जम चुके थें
वे आगे बढते ही चले जा रहें थें
कुछ लोगों के पाँव थम चुके थें
वे बीच रास्ते मे ही रूक चुके थें
उस मोड पर जाकर, वे खुद को मोड चुके थे

मैने लोगो को रौंदकर नहीं
साथ लेकर आगे बढना सीखा था
ऊँची इमारतें बहुत देखी जीवन में
कभी फर्श पर भी आना चाहा था

क्या मैं उस हिमालय-सी ऊँची पहाडी पर पहुँच पाता
अगर मैं अकेले ही आगे निकल जाता


कुछ लोग मुझे रौंदकर आगे निकल तो गएं
मैं पीछे रह गया, पता नही, शायद.... आगे

बेशक ! दुनिया मुझे पागल कहती है लेकिन
संगीत के लिए संगीतकार तो पागल ही होता है
जैसे प्यासा पानी के लिए पागल होता है
जैसे प्रेमी प्यार के प्याले के पागल होते है
जैसे कविता के लिए कवि पागल होता है
वैसे ही, काम के लिए जुनून तो पागल ही होता है

दौड तो समाप्त हुई नहीं अभी लेकिन
इस पागल दिल की एक कल्पना
मैं पीछे रह तो जाऊँगा अवश्य शायद लेकिन
मेरे दिल बाग में होंगें फूल अनेक
उनकें नसीब में केवल काँटें, अवश्य एक.......