क्या कहा उसने, सुना नहीं शायद कभी
क्यों न जाऊँ
मैं, उस राह मे कभी भी
मुझे भी पता है,
वहाँ दलदल है
मेरे पाँव भी फँस
सकते हैं वहाँ, लेकिन
मेरे अंदर मन मे
भी तो बहुत हलचल है
बेशक दुनिया गाली
देती है, वहाँ बसने वालो को
गंदगी बहुत है,
दागदार हो गए सबके दामन वहाँ
लेकिन अच्छी
जिंदगी तो, यहाँ पर भी नहीं है
हमे पता है,
गलतियाँ कहाँ है – कैसी है
तो बताओ क्यों न
जाऊँ मैं, उस राह में कभी भी
लोग गलतियाँ ढूँढ
निकालते हैं, समाधान भी खोज लेते है
न जाने क्यों वो
हर बार, अपने आप को रोक लेते हैं
सामर्थ्य है हम
सबमें, हमें ही बदलना होगा
कीचड में ही सही,
उम्मीद का पुष्प तो खिलाना ही होगा
हम लोगों को तो,
आगे आना ही होगा
आखिर कब तक लोग,
खुद को रोकते रहेंगे
आखिर कब तक हम,
उसे कोसते रहेंगे
कोई अधिकार नही
हम लोगो को कोसने का
कोई अधिकार नही
हम लोगो को धिक्कारने का
जब तक हम खुद पीछे
भागते रहेंगे
उम्मीद करते है,
अच्छे सुगंध की जरूर हम
फूल गुलाब का फिर
लगाते क्यों नहीं
चाहत रखते हैं,
अच्छे फल की जरूर हम
पेड आम का फिर
लगाते क्यों नहीं
लगा भी लिया तो
क्या, उसे सिंचते जहर से फिर क्यो हम
हमने ये चीजे
अपने ही लोगों से तो सीखी हैं
ये जहर भी हम
लोगों ने ही तो फैलाया है
अच्छे लोगो को भी
तो हमने ही रोका है
ऐसे क्यों न
मिलें केवल बुरे लोग वहाँ
तो बताओ क्यों न
जाऊँ कभी – भी मैं वहाँ
हम कहते हैं,
सुधरनी चाहिए ये व्यवस्था
दीमक खोखला कर
गए, इस आधुनिक युग में भी जिसे
उसे अच्छा होता
हुआ, देखना तो चाहते हैं जरूर हम
लेकिन फिर क्यों,
कोरी कागज छोड जाते उस दिन हम
जब हमारे ही
हाथों में होती है, देश के तकदीर की कलम
मन में एक आग सी
उठती है जरूर, लेकिन
उस आग में स्वयं
भस्म हो जाते हैं हम
शरीर काँप उठता
है, ह्रदय पिघल जाता है, फिर भी
क्यों नहीं बनाते
हम, खुद में बदलाव की कोई नीति
बता दूँ मैं
सबको, इसे ही कहते हैं राजनीति
जब तक अच्छे लोग
जाऐंगे नहीं, ये बुरी बनी रहेगी
लोग नहीं बदलेंगे
तो ये गलती – सडती रहेगी
कहने के लिए तो
ये अवश्य बदलती रहेगी
लेकिन हमारे दामन
की दाग शाश्वत बनी रहेगी
अच्छी राजनीति
केवल इतिहास के पन्नों में उतरती रहेगी!!!