बहुत ज्ञानी मिलेंगे यहाँ, संस्कार का पाठ पढ़ाने वाले
कोई नहीं मिलेगा, अश्लील सिनेमा का विरोध करने वाला
कोई नहीं मिलेगा, अश्लील सिनेमा का विरोध करने वाला
सशक्तिकरण की आड़ में, अश्लीलता का ये कैसा गंदा खेल
व्यापार ही धर्म है यहाँ, भ्रष्ट दिमाग, गंदी सोच और पैसे का ये मेल
व्यापार ही धर्म है यहाँ, भ्रष्ट दिमाग, गंदी सोच और पैसे का ये मेल
अर्धनग्न तस्वीरें अंतरंग दृश्य, ये कैसा सम्मान हैं
भोग विलास के वस्तु रूप में चित्रण, उसका घोर अपमान हैं
भोग विलास के वस्तु रूप में चित्रण, उसका घोर अपमान हैं
अरे! व्यापार नहीं, यदि नारी स्वतंत्रता और सशक्तिकरण हैं एकमात्र उद्देश्य
फ़िल्म बनाओ सावित्रीबाई फुले पर, जिन्होंने बालिकाओं के लिए खोले स्कूल अनेक
फ़िल्म बनाओ सावित्रीबाई फुले पर, जिन्होंने बालिकाओं के लिए खोले स्कूल अनेक
अरे फ़िल्म बनाओ रानी लक्ष्मीबाई, चेनम्मा, विजया लक्ष्मी पंडित पर
जिन्होंने घर की चार दिवारी तोड़, रचे महानतम इतिहास अनेक
जिन्होंने घर की चार दिवारी तोड़, रचे महानतम इतिहास अनेक
फ़िल्म बनाओ कल्पना चावला, बछेंद्री पाल और सरोजिनी नायडू पर
व्यक्तिगत स्वतंत्रता के कारण जो चढ़े जीवन की उच्चाइयों पर
व्यक्तिगत स्वतंत्रता के कारण जो चढ़े जीवन की उच्चाइयों पर
समाज की सोच बदलो, महिलाओं की महानता का परिचय करवाकर
समाज को मत बिगाड़ो, नारी को वस्तु रूप में चित्रित कर
समाज को मत बिगाड़ो, नारी को वस्तु रूप में चित्रित कर
तुम्हारी सोच वाक़ई,बहुत ही सकारात्मक है। सलाम है तुमको और तुम्हारी इस सुन्दर लेखनी को। बहुत ही बढ़िया भाई।
ReplyDeleteप्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद भाई।
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