मेरी खासियत है यह
आजतक मैंने खुद को
कभी रोका नहीं, कभी टोका नहीं
अपनी धारा में बहता गया
मानव जाति के विकास निमित्त
मन बंधन मुक्त होना चाहिए
कल्पना शक्ति उड़ान भरे
यही इसका उद्देश्य है
पसंद, प्यार, परंपरा और आकर्षण
लोग अक्सर धोखा खा जाते हैं
कभी रुकना भी जरुरी होता है
मरम्मत से ताकत बढ़ती ही है
घमंड कभी गौरव प्रदान करती है
नाश का कारण भी बनती है
कुछ बचा नहीं अब शेष
जो मैंने खुद को बहने दिया
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