Monday, April 24, 2017

ऐ जिंदगी

विचलित नहीं शायद, परेशान जरूर हूँ
डगमगाया हूँ शायद, गिरा नहीं हूँ



ऐ जिंदगी, तेरा रुख आज तक 
मैंने स्वयं ही मोड़ा है
अपने रास्ते आप ही बनाता हूँ
मुझे तोड़ दे, मेरा रुख मोड़ दे
ऐसी शक्ति तुझमे नहीं शायद
ऐसी शक्ति तुझमे नहीं शायद


आज अकेला हूँ, थका हुआ हूँ
रास्ते में कंकड़ हैं, खाली पावँ हूँ
कितना भी परेशान हूँ, कमजोर नहीं शायद
शक्ति हारी जरूर, हिम्मत नहीं शायद



परेशान जरूर हूँ, विचलित नहीं शायद
गिरा तो नहीं हूँ, डगमगाया हूँ शायद


कुछ पल, ये इम्तिहाँ बीत जाने दो
कुछ पल, ये समय गुजर जाने दो
ये जीवन सुख - दुख का तो संगम हैं
हँसने दो, रोने दो, मुस्कुराने दो
आखिर तुम्हारे रंग में ही रंग जाने दो



ऐ जिंदगी तू विशाल बहुत है
इतने कम समय में लोगो को
ना यूं गुम हो जाने दो

ऐ जिंदगी तू विशाल बहुत है
लोगो को थोड़ा मुस्कुराने दो
लोगो को थोड़ा मुस्कुराने दो



Image Source - Google

No comments:

Post a Comment