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Saturday, October 22, 2016

काँपते हुए कदम

मन में कुछ यादें ऐसे बस गई
उसे भूला नहीं पा रहा हूँ मैं
काम करने की इच्छा होते हुए भी
काम नहीं कर पा रहा हूँ मैं
काँटो की तरह ऐसी चुभी वो मन में
निकाल नहीं पा रहा हूँ मैं
काँपते हुए कदमों के साथ
आगे नहीं बढ पा रहा हूँ मैं
तीरो से भी ज्यादा छलनी किया
उन बातो ने दिल को मेरे
उस गहरे असीम घाव को
आज भी भर नहीं पा रहा हूँ मैं
आज भी भर नहीं पा रहा हूँ मैं
उन तीरो ने अवरूद्ध किया मेरा मार्ग
जिससे आगे बढ सकता था मैं
उस अंधकारमय रास्ते में भटकता-भटकता
कहाँ तक पहुँच सकता था मैं
इस मँझदार में कैसे पहुँचा
समझ नहीं पा रहा हूँ मैं
शायद गलती मेरी ही थी
फिर भी उन बातों को भूला नहीं पा रहा हूँ मैं
उस दिन उन शब्दो को सुन जब रोया था मैं
आवाज रूक गई थी मेरी
कंठ सूख गया था मेरा
शब्द नहीं थे मेरे पास हालात बयाँ करने को
मेरे एक-एक आँसू ऐसे गिरे धरा पर
ऐसे नम हुई आँखें मेरी कि
जैसे एक सपना टूट गया मेरा
और आज तक खुद को ठहरा हुआ महसूस करता हूँ मैं
ठहरा हुआ महसूस करता हूँ मैं
उन बातों को आज भी याद कर
दिल में एक चोट महसूस करता हूँ मैं
जिसकी आशा न थी मुझे
कानों में तैरते उन शब्दो को
आज भी सुन पाता हूँ मैं
आज भी सुन पाता हूँ मैं
इंतजार कर सकता हूँ मैं
बिना उम्मीद के सहारे
आगे नहीं बढ सकता हूँ मैं
अपने कदम नहीं बढा सकता हूँ मैं
केवल इंतजार कर सकता हूँ मैं
हाँ, इंतजार ही कर सकता हूँ मैं