सपनों से लगते वो दिन
हफ़्तों से चलती तैयारी
उछल - कूद और मस्ती वाली
हम बच्चों की वो दिवाली
बड़े - बुजुर्ग सफाई करते
हम दिये - मूर्ति - घरोंदे बनाते
घर मिट्टी- मिट्टी हो जाता
हर दिन चलता यही डरामा
घरोंदे को हम सजाते
लक्ष्मी - गणेश को उसमे बैठाते
पहले इनकी पूजा होती
फिर पुरे घर में दिये जलाते
साथ मिलकर मिठाइयां खाते
पटाखे और फुलझड़ियां जलाते
आई दिवाली खुशियाँ लायीं
उछल - कूद और मस्ती वाली
हम बच्चों की वो दिवाली