Tuesday, July 25, 2017
प्यार - एक अनकही दास्तां
Thursday, June 29, 2017
नारी स्वतंत्रता और सशक्तिकरण
कोई नहीं मिलेगा, अश्लील सिनेमा का विरोध करने वाला
व्यापार ही धर्म है यहाँ, भ्रष्ट दिमाग, गंदी सोच और पैसे का ये मेल
भोग विलास के वस्तु रूप में चित्रण, उसका घोर अपमान हैं
फ़िल्म बनाओ सावित्रीबाई फुले पर, जिन्होंने बालिकाओं के लिए खोले स्कूल अनेक
जिन्होंने घर की चार दिवारी तोड़, रचे महानतम इतिहास अनेक
व्यक्तिगत स्वतंत्रता के कारण जो चढ़े जीवन की उच्चाइयों पर
समाज को मत बिगाड़ो, नारी को वस्तु रूप में चित्रित कर
Wednesday, June 14, 2017
राजकवि चंदवरदाई जी
सभी हिंदी भाषी प्रेमियों के लिए, हिंदी भाषा के प्रथम कवि के रूप में विख्यात राजकवि श्री चंदबरदाई जी का संक्षिप्त परिचय -
राजकवि श्री चंदबरदाई जी को हिंदी का पहला कवि और उनकी रचना "पृथ्वीराज रासो" को हिंदी की पहली रचना होने का सम्मान प्राप्त है। पृथ्वीराज रासो हिंदी का सबसे बड़ा काव्य-ग्रंथ है। इसमें 10,000 से अधिक छंद हैं और तत्कालीन प्रचलित 6 भाषाओं का प्रयोग किया गया है। इस ग्रंथ में उत्तर भारतीय क्षत्रिय समाज व उनकी परंपराओं के विषय में विस्तृत जानकारी मिलती है, इस कारण ऐतिहासिक दृष्टि से भी इसका बहुत महत्व है।
वे भारत के महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान तृतीय के मित्र तथा राजकवि थे। सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने 1165 से 1192 तक अजमेर व दिल्ली पर राज किया। यही राजकवि चंदबरदाई जी का रचनाकाल भी था। इनका जीवन पृथ्वीराज चौहान के जीवन के साथ इस तरह मिला हुआ था कि अलग नहीं किया जा सकता। युद्ध में, आखेट में, सभा में, यात्रा में, सदा महाराज के साथ रहते थे और जहाँ जो बातें होती थीं, सब में सम्मिलित रहते थे। यहां तक कि मुहम्मद गोरी के द्वारा जब पृथ्वीराज चौहान को परास्त करके एवं उन्हे बंदी बना करके गजनी ले जाया गया तो ये भी स्वयं को वश मे नही कर सके एवं गजनी चले गये। ऐसा माना जाता है कि कैद मे बंद पृथ्वीराज चौहान को जब अन्धा कर दिया गया तो उन्हें इस अवस्था में देख कर इनका हृदय द्रवित हो गया एवं इन्होंने गोरी के वध की योजना बनायी। उक्त योजना के अंतर्गत इन्होंने पहले तो गोरी का हृदय जीता एवं फिर गोरी को यह बताया कि पृथ्वीराज चौहान शब्दभेदी बाण चला सकता है। इससे प्रभावित होकर मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान की इस कला को देखने की इच्छा प्रकट की। प्रदर्शन के दिन चंदवरदाई जी गोरी के साथ ही मंच पर बैठे। अंधे पृथ्वीराज चौहान को मैदान में लाया गया एवं उनसे अपनी कला का प्रदर्शन करने को कहा गया। पृथ्वीराज चौहान के द्वारा जैसे ही एक घण्टे के ऊपर बाण चलाया गया गोरी के मुँह से अकस्मात ही "वाह! वाह!!" शब्द निकल पड़ा बस फिर क्या था चंदबरदाई जी ने तत्काल एक दोहे में सम्राट पृथ्वीराज चौहान को यह बता दिया कि गोरी कहाँ पर एवं कितनी ऊँचाई पर बैठा हुआ है। वह दोहा इस प्रकार था:
चार बाँस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमान!
ता ऊपर सुल्तान है, मत चूके चौहान!!
इस प्रकार राजकवि चंदबरदाई जी की सहायता से सम्राट पृथ्वीराज चौहान के द्वारा गोरी का वध कर दिया गया। इनके द्वारा रचित पृथ्वीराज रासो को हिंदी भाषा का पहला प्रामाणिक काव्य माना जाता है।
Thursday, June 1, 2017
राजनीति
सच्ची बात
Monday, April 24, 2017
ऐ जिंदगी
Friday, March 10, 2017
मैं बहुत जिद्दी हूँ
काम किसी के होते नहीं
कुछ करके दिखाना है
कुछ करके दिखाना है

