समाज से सीखा गुर है
मैं बहुत जिद्दी हूँ
काम किसी के होते नहीं
करवाना पड़ता है
मांगने वाले दूर बैठे है
हक़ मिलते नहीं यहाँ
छीनना पड़ता है
मैं बहुत जिद्दी हूँ
रोकते थे जो पहले
आज सलाम ठोकते है
कल के रास्ते के कांटे
आज फूल बने बैठे हैं
इसी उम्मीद में जीता हूँ
इसी उम्मीद में जी रहा हूँ
कुछ करके दिखाना है
कुछ करके दिखाना है
समाज को बदलना है
समाज को बदलना है
मैं बहुत जिद्दी हूँ
मैं बहुत ही जिद्दी हूँ
आदत नहीं शायद
समाज से सीखा गुर है...


