Monday, April 24, 2017

ऐ जिंदगी

विचलित नहीं शायद, परेशान जरूर हूँ
डगमगाया हूँ शायद, गिरा नहीं हूँ



ऐ जिंदगी, तेरा रुख आज तक 
मैंने स्वयं ही मोड़ा है
अपने रास्ते आप ही बनाता हूँ
मुझे तोड़ दे, मेरा रुख मोड़ दे
ऐसी शक्ति तुझमे नहीं शायद
ऐसी शक्ति तुझमे नहीं शायद


आज अकेला हूँ, थका हुआ हूँ
रास्ते में कंकड़ हैं, खाली पावँ हूँ
कितना भी परेशान हूँ, कमजोर नहीं शायद
शक्ति हारी जरूर, हिम्मत नहीं शायद



परेशान जरूर हूँ, विचलित नहीं शायद
गिरा तो नहीं हूँ, डगमगाया हूँ शायद


कुछ पल, ये इम्तिहाँ बीत जाने दो
कुछ पल, ये समय गुजर जाने दो
ये जीवन सुख - दुख का तो संगम हैं
हँसने दो, रोने दो, मुस्कुराने दो
आखिर तुम्हारे रंग में ही रंग जाने दो



ऐ जिंदगी तू विशाल बहुत है
इतने कम समय में लोगो को
ना यूं गुम हो जाने दो

ऐ जिंदगी तू विशाल बहुत है
लोगो को थोड़ा मुस्कुराने दो
लोगो को थोड़ा मुस्कुराने दो



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Friday, March 10, 2017

मैं बहुत जिद्दी हूँ

मैं बहुत ही जिद्दी हूँ
आदत नहीं शायद  
समाज से सीखा गुर है
मैं बहुत जिद्दी हूँ    



काम किसी के होते नहीं 
करवाना पड़ता है
मांगने वाले दूर बैठे है
हक़ मिलते नहीं यहाँ
छीनना पड़ता है
मैं बहुत जिद्दी हूँ

रोकते थे जो पहले   
आज सलाम ठोकते है
कल के रास्ते के कांटे 
 आज फूल बने बैठे हैं 

इसी उम्मीद में जीता हूँ
इसी उम्मीद में जी रहा हूँ

कुछ करके दिखाना है
कुछ करके दिखाना है
समाज को बदलना है
समाज को बदलना है


मैं बहुत जिद्दी हूँ
मैं बहुत ही जिद्दी हूँ
आदत नहीं शायद  
समाज से सीखा गुर है...

Monday, January 9, 2017

दलदल

ये दुनिया बिष से भरा प्याला है
कुछ तो प्रेम रस घोलो इसमे
प्याली सफेद न कर सकते
काला तो मत करो इसे


राह न दिखा सके तो क्या हुआ
राह न भटकाओ इसे
रोशन न कर सकते इस दुनिया को 
अंधकार न फैलाओ इसमे


उससे पूछा तो होता 
एक बार, उसकी सुनी तो होती
उसने चोरी क्यों की
क्यों कूदा इस दलदल मे


हाथ थाम कर तो देखते 
मन टटोल कर तो देखते
उस बदजुबां बालक का
कहीं वो अनाथ तो नही











पत्थर तो सभी मारते है
कभी उसके घाव को हाथ लगाते
पता चलता वो गुमनाम चेहरा भी
हमारे ही रक्त से सींचा हुआ है


तुमने इतना ही जाना इसे
जितना पर्दे ने दिखाया तुम्हे
कभी पर्दा हटाया तो होता 
कभी अंदर झाँक कर देखा तो होता


कभी उससे पूछा तो होता
कभी अपनापन दिखाया तो होता
कभी प्यार बिखेरा तो होता
कभी हाथ बढ़ाया तो होता


ये दुनिया बिष से भरा प्याला है
कुछ तो प्रेम रस घोलो इसमे
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Wednesday, December 14, 2016

भारत अद्वितीय महान है...

इतिहास कह रहा आज वर्तमान से
सिख लो कुछ हमारे भी छाँव से
ऐसी विपदा आएगी विधान से
सब कुछ छिन जायेगा हिन्दुस्तान से

आत्मा से शरीर प्राणवान है
नींव से मकान बलवान है
अब - भी बहुत जान - शान है
बनो विश्वगुरु, भारत अद्वितीय महान है

मैकॉले घोषित कर गया, कैसी यह बेतुकी शिक्षा
मानसिक अवसाद के बीज यहाँ, आत्महत्या इसकी फसल
गरीब चक्की पीस रहा, अमीर फसल काट रहे
नवोन्मेषण बना एक आडम्बर, नक़ल और प्रचार है बारम्बर

मातृभाषा को भूल, अंग्रेजी को आत्मसात किये हो
नींव को खोखला कर, भव्य इमारत की कल्पना किये हो
विकास की चाह में, संस्कृति को तुम भूल गए
भविष्य के गर्भ में, इतिहास को तुम लील गए

अरे! नालंदा और तक्षशीला इसी भूमि की देन है
महीनों जलते रहे पुस्तक यहाँ के, उसकी भी क्या शान है
अपनी भाषा में ज्ञान, एक अद्भुत वरदान है
आर्यभट्ट और चाणक्य विद्वान, शुन्य का प्रतिपादन यहाँ
बुद्ध, महावीर, कृष्ण और गांधी, अहिंसा का पाठ यहाँ

इतिहास कह रहा आज वर्तमान से
सिख लो कुछ हमारे भी छाँव से
अब भी बहुत जान - शान है
बनो विश्वगुरु, भारत अद्वितीय महान है
भारत अद्वितीय महान है...

Wednesday, November 30, 2016

बदलाव

मैं बदलता रहता हूँ
समय बदलता रहता है


उसकी यही नियति है
वह बंधा हुआ है बंधन में
यह उसकी मज़बूरी है 
वह ठहर नहीं सकता
उसकी रफ़्तार एकसमान है
उसे गुजरना पड़ता है
उसे बदलना पड़ता है


मेरी कोई मज़बूरी नहीं
लेकिन मुझे ठहरना पसंद नहीं
चुनोतियों से टकराना अच्छा लगता है
नयी चुनोतियाँ पैदा करता हूँ
पार पाना अच्छा लगता है


हर पल जोश से भरा हुआ
काम करना अच्छा लगता है
आगे बढ़ता जाता हूं
लक्ष्य बदलते रहते है


मैं बदलता रहता हूं
समय बदलता रहता है
मेरी कोई मज़बूरी नहीं
उसे गुजरना पड़ता है

Friday, November 18, 2016

जो मैंने खुद को बहने दिया...

मेरी खासियत है यह
आजतक मैंने खुद को
कभी रोका नहीं, कभी टोका नहीं
अपनी धारा में बहता गया


मानव जाति के विकास निमित्त
मन बंधन मुक्त होना चाहिए
कल्पना शक्ति उड़ान भरे
यही इसका उद्देश्य है


पसंद, प्यार, परंपरा और आकर्षण 
लोग अक्सर धोखा खा जाते हैं
कभी रुकना भी जरुरी होता है
मरम्मत से ताकत बढ़ती ही है


घमंड कभी गौरव प्रदान करती है
नाश का कारण भी बनती है
कुछ बचा नहीं अब शेष
जो मैंने खुद को बहने दिया

Tuesday, November 8, 2016

रिश्ते

दूर रहकर भी कितने पास हैं हम
पास होकर भी बहुत दूर हैं हम

दूरियां हाथ मिलाने से नहीं
दिलों के मिलने से मिटती है


खट्टी - मीठी नोंक - झोंक
फिर प्यारी - सी मुस्कान
चेहरे पर संतोष का भाव
आँखों से छलकता प्यार
रिश्ते की सही पहचान

कहीं रिश्ते विलीन हो जाते हैं
आपसी नोंक - झोंक में
कहीं झगड़े समां जाते हैं
रिश्ते की गहराइयों में

धीमी आंच पर पका भोजन
अधिक स्वादिष्ट होता है
धीरे धीरे दोस्ती से शुरुआत हो
रिश्ता ज्यादा गहरा होता हैं


दोस्ती के बंधन की दुनिया गुलाम
प्यार के समंदर में गोता लगाते लोग
इसे मापने की कोई इकाई नहीं
लेकिन धड़कनो से इसे मापा जाता हैं

दूरियां हाथ मिलाने से नहीं
दिलों के मिलने से मिटती है