Tuesday, April 7, 2020
जब तुम भी मुझमे समां जाओ...
Sunday, November 19, 2017
रानी लक्ष्मीबाई - नारी सशक्तिकरण
मनु ने भी उसी हँसी के साथ कहा - और तुम्हारे बालों में अखाड़े की मिट्टी भर जाएगी।
वे सब खिलखिलाकर हँस पड़ी।
Tuesday, July 25, 2017
प्यार - एक अनकही दास्तां
Thursday, June 29, 2017
नारी स्वतंत्रता और सशक्तिकरण
कोई नहीं मिलेगा, अश्लील सिनेमा का विरोध करने वाला
व्यापार ही धर्म है यहाँ, भ्रष्ट दिमाग, गंदी सोच और पैसे का ये मेल
भोग विलास के वस्तु रूप में चित्रण, उसका घोर अपमान हैं
फ़िल्म बनाओ सावित्रीबाई फुले पर, जिन्होंने बालिकाओं के लिए खोले स्कूल अनेक
जिन्होंने घर की चार दिवारी तोड़, रचे महानतम इतिहास अनेक
व्यक्तिगत स्वतंत्रता के कारण जो चढ़े जीवन की उच्चाइयों पर
समाज को मत बिगाड़ो, नारी को वस्तु रूप में चित्रित कर
Wednesday, June 14, 2017
राजकवि चंदवरदाई जी
सभी हिंदी भाषी प्रेमियों के लिए, हिंदी भाषा के प्रथम कवि के रूप में विख्यात राजकवि श्री चंदबरदाई जी का संक्षिप्त परिचय -
राजकवि श्री चंदबरदाई जी को हिंदी का पहला कवि और उनकी रचना "पृथ्वीराज रासो" को हिंदी की पहली रचना होने का सम्मान प्राप्त है। पृथ्वीराज रासो हिंदी का सबसे बड़ा काव्य-ग्रंथ है। इसमें 10,000 से अधिक छंद हैं और तत्कालीन प्रचलित 6 भाषाओं का प्रयोग किया गया है। इस ग्रंथ में उत्तर भारतीय क्षत्रिय समाज व उनकी परंपराओं के विषय में विस्तृत जानकारी मिलती है, इस कारण ऐतिहासिक दृष्टि से भी इसका बहुत महत्व है।
वे भारत के महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान तृतीय के मित्र तथा राजकवि थे। सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने 1165 से 1192 तक अजमेर व दिल्ली पर राज किया। यही राजकवि चंदबरदाई जी का रचनाकाल भी था। इनका जीवन पृथ्वीराज चौहान के जीवन के साथ इस तरह मिला हुआ था कि अलग नहीं किया जा सकता। युद्ध में, आखेट में, सभा में, यात्रा में, सदा महाराज के साथ रहते थे और जहाँ जो बातें होती थीं, सब में सम्मिलित रहते थे। यहां तक कि मुहम्मद गोरी के द्वारा जब पृथ्वीराज चौहान को परास्त करके एवं उन्हे बंदी बना करके गजनी ले जाया गया तो ये भी स्वयं को वश मे नही कर सके एवं गजनी चले गये। ऐसा माना जाता है कि कैद मे बंद पृथ्वीराज चौहान को जब अन्धा कर दिया गया तो उन्हें इस अवस्था में देख कर इनका हृदय द्रवित हो गया एवं इन्होंने गोरी के वध की योजना बनायी। उक्त योजना के अंतर्गत इन्होंने पहले तो गोरी का हृदय जीता एवं फिर गोरी को यह बताया कि पृथ्वीराज चौहान शब्दभेदी बाण चला सकता है। इससे प्रभावित होकर मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान की इस कला को देखने की इच्छा प्रकट की। प्रदर्शन के दिन चंदवरदाई जी गोरी के साथ ही मंच पर बैठे। अंधे पृथ्वीराज चौहान को मैदान में लाया गया एवं उनसे अपनी कला का प्रदर्शन करने को कहा गया। पृथ्वीराज चौहान के द्वारा जैसे ही एक घण्टे के ऊपर बाण चलाया गया गोरी के मुँह से अकस्मात ही "वाह! वाह!!" शब्द निकल पड़ा बस फिर क्या था चंदबरदाई जी ने तत्काल एक दोहे में सम्राट पृथ्वीराज चौहान को यह बता दिया कि गोरी कहाँ पर एवं कितनी ऊँचाई पर बैठा हुआ है। वह दोहा इस प्रकार था:
चार बाँस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमान!
ता ऊपर सुल्तान है, मत चूके चौहान!!
इस प्रकार राजकवि चंदबरदाई जी की सहायता से सम्राट पृथ्वीराज चौहान के द्वारा गोरी का वध कर दिया गया। इनके द्वारा रचित पृथ्वीराज रासो को हिंदी भाषा का पहला प्रामाणिक काव्य माना जाता है।
Thursday, June 1, 2017
राजनीति
सच्ची बात
Monday, April 24, 2017
ऐ जिंदगी
Friday, March 10, 2017
मैं बहुत जिद्दी हूँ
काम किसी के होते नहीं
कुछ करके दिखाना है
कुछ करके दिखाना है
Monday, January 9, 2017
दलदल
Wednesday, December 14, 2016
भारत अद्वितीय महान है...
विकास की चाह में, संस्कृति को तुम भूल गए
Wednesday, November 30, 2016
बदलाव
Friday, November 18, 2016
जो मैंने खुद को बहने दिया...
Tuesday, November 8, 2016
रिश्ते
पास होकर भी बहुत दूर हैं हम
दूरियां हाथ मिलाने से नहीं

दोस्ती के बंधन की दुनिया गुलाम
प्यार के समंदर में गोता लगाते लोग
इसे मापने की कोई इकाई नहीं
लेकिन धड़कनो से इसे मापा जाता हैं
Wednesday, November 2, 2016
संघर्ष
Monday, October 31, 2016
दिवाली - बच्चों वाली
Sunday, October 30, 2016
परिवार
Wednesday, October 26, 2016
मैं चला हूँ...
Saturday, October 22, 2016
काँपते हुए कदम
उसे भूला नहीं पा रहा हूँ मैं
काम करने की इच्छा होते हुए भी
काम नहीं कर पा रहा हूँ मैं
निकाल नहीं पा रहा हूँ मैं
काँपते हुए कदमों के साथ
आगे नहीं बढ पा रहा हूँ मैं
उन बातो ने दिल को मेरे
उस गहरे असीम घाव को
आज भी भर नहीं पा रहा हूँ मैं
आज भी भर नहीं पा रहा हूँ मैं
जिससे आगे बढ सकता था मैं
उस अंधकारमय रास्ते में भटकता-भटकता
कहाँ तक पहुँच सकता था मैं
समझ नहीं पा रहा हूँ मैं
शायद गलती मेरी ही थी
फिर भी उन बातों को भूला नहीं पा रहा हूँ मैं
आवाज रूक गई थी मेरी
कंठ सूख गया था मेरा
शब्द नहीं थे मेरे पास हालात बयाँ करने को
ऐसे नम हुई आँखें मेरी कि
जैसे एक सपना टूट गया मेरा
और आज तक खुद को ठहरा हुआ महसूस करता हूँ मैं
ठहरा हुआ महसूस करता हूँ मैं
दिल में एक चोट महसूस करता हूँ मैं
जिसकी आशा न थी मुझे
कानों में तैरते उन शब्दो को
आज भी सुन पाता हूँ मैं
आज भी सुन पाता हूँ मैं
बिना उम्मीद के सहारे
आगे नहीं बढ सकता हूँ मैं
अपने कदम नहीं बढा सकता हूँ मैं
केवल इंतजार कर सकता हूँ मैं
हाँ, इंतजार ही कर सकता हूँ मैं


